शासकीय महाविद्यालय में मनाया संविधान दिवस,प्रबुद्धजनों ने रखे अपने विचार
पानसेमल।श्री अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के अंतर्गत भारतीय संविधान दिवस मनाया। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. संगीता भंडारी की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित हुआ,मुख्य वक्ता डॉ.सुनील बागले ने कहा की वर्ष 2015 में भारत सरकार ने 26 नवंबर संविधान दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। संविधान दिवस सिर्फ देश की सरकार और राजनीतिक पार्टियों का पर्व नहीं है,बल्कि पूरे देश की जनता का पर्व है देश के हर नागरिक के लिए गर्व का दिन है। डॉ राजेश दिवाकर ने कहा कि भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है यह संविधान ही है जो हमें एक आजाद नागरिक की भावना का एहसास कराता है संविधान दिवस हमें न्याय, समानता और एकता के मूल्यों को समझने की प्रेरणा देता है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संगीता भंडारी ने कहा कि भारत रत्न बाबासाहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर की अद्भुत दृष्टि, प्रखर विचार और अथक परिश्रम से निर्मित हमारा संविधान विश्व के सबसे सशक्त लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है संविधान राष्ट्र की एकता अखंडता और प्रगति का आधार होने के साथ ही हर नागरिक को समान अधिकार सम्मान और अवसर भी प्रदान करता है।डॉ.मंजुला चौहान ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए एवं बताया कि भारत का संविधान देश को एक संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष,समाजवादी और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है।प्रो.अभिनव पांडे ने कहा कि आज का दिन हमें संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों, कर्तव्यों और उन आदर्शों की याद दिलाता है जिन पर हमारा लोकतंत्र खड़ा है।इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं रवीन आर्य,जितेंद्र गिरासे,भारत पटेल,गुरुचरण भंडारी,योगेश्वरी शिंदे ने अपने विचार व्यक्त किए एवं साथ ही भारतीय संविधान की उद्देशिका का सामूहिक वाचन भी किया गया इस अवसर पर समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन छात्र अर्जुन सोलंकी एवं आभार डॉ.निशा वास्कले ने माना।

