राजभाषा निरीक्षण बैठकों हेतु हैदराबाद–तिरुपति दौरे पर राज्यसभा सांसद डॉ.सोलंकी

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राजभाषा निरीक्षण बैठकों हेतु हैदराबाद–तिरुपति दौरे पर राज्यसभा सांसद डॉ.सोलंकी

संसदीय राजभाषा समिति की दूसरी उप समिति के सदस्य एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी इन दिनों हैदराबाद और तिरुपति के पांच दिवसीय राजभाषा निरीक्षण दौरे पर हैं। समिति द्वारा आयोजित यह अध्ययन यात्रा देशभर के विभिन्न केंद्रीय सरकारी विभागों, उपक्रमों और अनुसंधान संस्थानों में राजभाषा हिंदी के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए की जा रही है।
दौरे के प्रथम दिन हैदराबाद में समिति ने विभिन्न कार्यालयों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों से संवाद स्थापित किया और राजभाषा नीति के अनुपालन पर विस्तृत चर्चा की। अधिकारियों को कार्यस्थलों पर हिंदी के अधिकतम उपयोग, पत्राचार में सरल एवं प्रभावी हिंदी अपनाने तथा राजभाषा से जुड़े प्रावधानों का पूरी निष्ठा से पालन करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
सांसद डॉ. सोलंकी ने कहा कि राजभाषा हिंदी भारत की एकता, संवैधानिक दायित्व और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के सहज और व्यापक उपयोग से देश की कार्यप्रणाली और अधिक सुदृढ़ और संगठित बनती है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से आग्रह किया कि हिंदी के प्रयोग को केवल औपचारिकता न मानें, बल्कि इसे राष्ट्र–निर्माण में अपनी सहभागिता के रूप में अपनाएँ।

राजभाषा निरीक्षण बैठकों हेतु हैदराबाद–तिरुपति दौरे पर राज्यसभा सांसद डॉ.सोलंकी

राजभाषा समिति द्वारा इस निरीक्षण यात्रा के दौरान संकलित किया गया प्रतिवेदन आगामी समय में महामहिम राष्ट्रपति, भारत सरकार को सम्मानपूर्वक प्रस्तुत किया जाएगा। यह प्रतिवेदन राजभाषा संबंधी नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा भविष्य की दिशा तय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दौरे के आगामी चरण में समिति तिरुपति जाएगी, जहाँ विभिन्न केंद्रीय विभागों एवं संस्थानों का निरीक्षण कर राजभाषा हिंदी के उपयोग की प्रगति का अवलोकन किया जाएगा। समिति देश के दक्षिणी क्षेत्रों में हिंदी के प्रसार, व्यवहारिक कठिनाइयों एवं समाधान पर विशेष ध्यान देगी।
डॉ. सोलंकी ने कहा कि यह निरीक्षण यात्रा केवल समीक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता की भावना को सुदृढ़ करने का भी अवसर है। राजभाषा हिंदी को सशक्त बनाना देश की प्रशासनिक सरलता,पारदर्शिता और जनता से संवाद की शक्ति को बढ़ाने का महत्वपूर्ण आधार है।

बड़वानी/संजय बामनिया की रिपोर्ट

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