शोध यात्रा 2025: कुंभखेत में स्कूल के बच्चों ने किऐ आईआईटी और आईआईएम के वैज्ञानिकों से सवाल
शोध यात्रा 2025 में आज आईआईएम इंदौर और आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने कुंभ खेत के स्कूल में बच्चों के साथ में बातचीत की। वैज्ञानिकों ने बच्चों से पूछा की इंदौर का नाम कितने लोगों ने सुना है तो तो अधिकांश बच्चों ने नाम भी नहीं सुना था परंतु लगभग सभी बच्चों को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं देश की राष्ट्रपति महामहीम श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का नाम अवश्य पता था। यह एक सुदूर क्षेत्र है लेकिन यहां के बच्चे भी जागरूक हैं यह उन्होंने अपने जवाबों से बता दिया। उनमें से कुछ बच्चों ने आईआईटी और आईआईएम के वैज्ञानिकों से भी सवाल पूछे। वैज्ञानिकों ने उन्हें बताया कि 10वीं और 12वीं के बाद में कौन-कौन से विषय और कोर्स किया जा सकते हैं, उन कोर्सेज को करने से किस तरह की स्किल मिलेगी और समाज में किस तरह से हम लोग अपना भाग दे सकेंगे। क्षेत्र के आदिवासी डॉक्टर ने भी उनसे बातचीत करी और बताया की किस तरीके से संघर्ष करके उन्हें एक दूसरे की मदद करी जानकारी दी और साथ के लोगों को आगे बढ़ाया। इस तरह से मदद करना हर आदिवासी की विशेषता है और हम सबको भी एक दूसरे की मदद करना है।
वहां के वैज्ञानिकों ने गांव को देखकर के कहा कि इस तरह के गांव हमारे कल्पनाओं में भी नहीं है। यहां के गांव देखकर के लगता है कि हमारे यहां के गांव तो शहर ही हैं। उन्होंने प्रातः कालीन दास कार्यक्रम में भी सभा किया और कुंभ खेत में जो सैकड़ो उपजाऊ मिट्टी पहाड़ों से भाकर जा रही है उसको रोकने के लिए छोटे चेक डैम पहाड़ी नालों में बनाए। उन्होंने महिला स्वास्थ्य बच्चों के स्वास्थ्य मिट्टी और खेती आदि के विषय में भी अपने बहुत सारे ऑब्जरवेशन साझा किये। उनका ऑब्जरवेशन था कि जीवन यापन के लिए मिनिमम आवश्यकताओं की भी उपलब्धता नहीं होना आदिवासियों के सामने पलायन की मजबूरी खड़ी कर रही है। उसके लिए कुछ स्किल डेवलपमेंट करना यहां की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। बहुत कपास होने के बाद में भी कपास के वैल्यू एडिशन और पेड़ों की उपलब्धता के बाद में भी उसके वैल्यू एडिशन की स्किल यहां कम ही है। आज मेडिकल कैंप में बड़वानी से डॉक्टर महिमा बामनिया एवं डॉक्टर रीना डावर ने भी अपनी सेवाएं दी। लगभग डेढ़ सौ लोगों का इलाज किया गया जिनमें लगभग 80 से ज्यादा महिलाएं रही। डॉ महिमा बामनिया, महिला रोग विशेषज्ञ ने बहुत सारी महिलाओं संबंधी समस्याओं का समाधान इस शिविर में किया और उचित उपचार दिया।
सभी का सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, और शुगर की जांच की गई।
यात्रा यहां से गोलपाटीवाडी, कालाखेत होकर के बोकराटा पहुंचेगी। बोकराटा में संध्या 4:00 बजे से गांव ढायले, पटेल, बडवे, पूजारे, कोतवाल और गांव के 70-80 साल के वरिष्ठ लोगों से गांव की परंपराओं और पुराने समय में गांव की स्थितियों पर खाटला बैठक का आयोजन होगा। कल पिपरकुंड में यात्रा का समापन होगा।

