अनादि काल से चली आ रही बापदेव यात्रा,आदिवासी परंपरा के निर्वहन हेतु दिया आमंत्रण।

अनादि काल से चली आ रही बापदेव यात्रा,आदिवासी परंपरा के निर्वहन हेतु दिया आमंत्रण।

बड़वानी

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अनादि काल से चली आ रही बापदेव यात्रा,आदिवासी परंपरा के निर्वहन हेतु दिया आमंत्रण।

बड़वानी जिले के डोंगरगांव से रामगढ़ तक बापदेव यात्रा (जल-जंगल संकल्प यात्रा) का आयोजन 7 दिसंबर रविवार मोटरसाइकल यात्रा का आयोजन किया जा रहा है जो बापदेव, डोंगरगांव से, सुबह 7 बजे प्रारंभ होकर रामगढ़ पहुंचेगी।आयोजन में शामिल हो रहे सर्व आदिवासी समाज के गांव डाहला,पटेल,पुजारा, वारती ओर कोटवार ने बताया कि यात्रा में परम पूज्य पहाड़सिंह महाराज का आशीर्वाद प्राप्त होगा,हमारी अनादि काल से चली आ रही आदिवासी संस्कृति और परंपरा का मूल केंद्र हमारे बापदेव है।बापदेव के बैठने से ही गांव बसता है।बापदेव आदिवासीयों,उनके जानवर और फसल की रक्षा करते हैं।पहले आदिवासी हर खुशी और दुख के समय बापदेव पूजते थे। पर आज यह कम हो रहा है।बयड़ी में घने जंगलों से ढंके रहने वाले हमारे बापदेव आज खुले में धूप और बारीश झेल रहें हैं।हमारे पुरखों की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य है।आज यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम हमारे बापदेव की पूजा करके उनकी बयड़ी पर ढास करके जल रोकेंगे और घना जंगल लगाएंगे यह मोटरसाइकिल यात्रा है डोंगरगांव से दस गांवों में बापदेव पूजती हुई रामगढ़ तक जाएगी। रामगढ़ में इसका समापन होगा।बापदेव की बयडी पर जल-जंगल के संकल्प अपने युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने,आदिवासीयों को अपनी जड़ों से मजबूत करने के मुख्य उद्देश्य से यात्रा निकाली जा रही है,समस्त आदिवासी समाज को आमंत्रित किया गया है।

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